
बाराबंकी के हैदरगढ़ टोल प्लाजा पर अधिवक्ता रत्नेश शुक्ला के साथ हुई मारपीट के बाद पूरे प्रदेश में अधिवक्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा है। इस पूरे मामले को लेकर लखनऊ बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने शुक्रवार शाम 4:30 बजे एक संयुक्त बैठक बुलाई है। वहीं घटना के अगले ही दिन लखनऊ समेत उत्तर प्रदेश के कई जनपदों से अधिवक्ता बाराबंकी पहुंचे और हैदरगढ़ टोल प्लाजा के बाहर जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिया।
प्रदर्शन के चलते टोल प्लाजा पर आवागमन पूरी तरह ठप हो गया, जबकि मौके पर भारी पुलिस बल और वरिष्ठ अधिकारी तैनात रहे।

हैदरगढ़ टोल प्लाजा पर रास्ता जाम, पुलिस तैनात
अधिवक्ताओं के प्रदर्शन के कारण हैदरगढ़ टोल प्लाजा पर आने-जाने का रास्ता पूरी तरह ब्लॉक हो गया। हालात को नियंत्रित करने के लिए बाराबंकी पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद हैं। अधिवक्ताओं का कहना है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, आंदोलन जारी रहेगा।

पांच आरोपियों को जेल, लेकिन कार्रवाई से असंतोष
पुलिस ने अधिवक्ता रत्नेश शुक्ला से मारपीट के मामले में चार नामजद समेत कुल पांच आरोपियों को जेल भेज दिया है। इसके बावजूद अधिवक्ताओं का कहना है कि कार्रवाई अधूरी है। उनका आरोप है कि घटना के लिए जिम्मेदार चौकी इंचार्ज और अन्य टोलकर्मियों पर अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
चौकी इंचार्ज के निलंबन की मांग
प्रदर्शन कर रहे अधिवक्ताओं ने साफ कहा कि दोषी चौकी इंचार्ज इंस्पेक्टर को तत्काल निलंबित किया जाए। साथ ही टोल प्लाजा पर मारपीट में शामिल अन्य टोलकर्मियों के खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

लखनऊ बार एसोसिएशन की आपात बैठक बुलाई
इस पूरे मामले को लेकर लखनऊ बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने शुक्रवार शाम 4:30 बजे एक संयुक्त बैठक बुलाई है। यह बैठक लखनऊ बार एसोसिएशन के कार्यालय स्थित विवेकानंद सभागार में होगी, जिसमें आगे की रणनीति पर निर्णय लिया जाएगा।
मुख्यमंत्री को भेजा गया कड़ा पत्र
लखनऊ बार एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर टोल प्लाजा पर बढ़ती हिंसा पर गहरा रोष जताया है। पत्र में 14 जनवरी 2026 को हैदरगढ़ टोल प्लाजा पर अधिवक्ता रत्नेश शुक्ला के साथ हुई मारपीट को बर्बर और अस्वीकार्य बताते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।
टोल प्लाजा पर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
पत्र में कहा गया है कि सीसीटीवी फुटेज में साफ दिख रहा है कि टोल कर्मियों ने अधिवक्ता को घेरकर पीटा, गाली-गलौज की और माफी मांगने के लिए मजबूर किया। इससे टोल प्रबंधन की गुंडागर्दी और कानून व्यवस्था की विफलता उजागर होती है।
कड़े सुरक्षा और कानूनी उपायों की मांग
लखनऊ बार एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि सभी टोल प्लाजा पर स्थायी पुलिस चौकी स्थापित की जाए और सीसीटीवी की 24 घंटे निगरानी हो। एनएचएआई के अनुबंधों में सुरक्षा संबंधी सख्त प्रावधान जोड़े जाएं और उल्लंघन पर टोल प्लाजा संचालकों पर भारी जुर्माना लगाया जाए।
रासुका लगाने की भी मांग
अधिवक्ताओं ने रत्नेश शुक्ला प्रकरण में दोषी टोल कर्मियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत कार्रवाई की मांग की है। साथ ही सभी टोल प्लाजा हिंसा मामलों में तत्काल एफआईआर, लाइसेंस निरस्तीकरण और दोषियों को ब्लैकलिस्ट करने की मांग उठाई गई है।
संयुक्त बार संगठनों की बैठक तय
टोल प्लाजा की घटनाओं और अधिवक्ता हितों को लेकर अवध बार एसोसिएशन, सेंट्रल बार एसोसिएशन और लखनऊ बार एसोसिएशन की संयुक्त बैठक भी प्रस्तावित है। बैठक में आंदोलन की आगे की रूपरेखा और सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति तय की जाएगी।
कानून व्यवस्था पर खड़े हुए सवाल
हैदरगढ़ टोल कांड के बाद अधिवक्ताओं का कहना है कि यह कोई एक घटना नहीं, बल्कि प्रदेश में टोल प्लाजा पर लगातार हो रही हिंसा की कड़ी है। यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो अधिवक्ता समुदाय और आम नागरिकों की सुरक्षा खतरे में पड़ती रहेगी।

