
लखनऊ में 69 हजार शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों और पुलिस के बीच प्रदर्शन के दौरान झड़प हो गई। रास्ता रोके जाने पर प्रदर्शनकारी भड़क गए। इसके बाद धक्का-मुक्की और नोकझोंक शुरू हो गई। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को जबरन उठाकर बसों में बैठा दिया।
प्रदर्शनकारियों को ठूस-ठूसकर बसों में भरकर इको गार्डन ले जाया गया। आरोप है कि इस दौरान पुलिस ने उनके बैनर भी फाड़ दिए। प्रदर्शनकारी सोमवार सुबह करीब 11 बजे मौके पर पहुंचे थे।
एक प्रदर्शनकारी ‘मैं अभागा पिछड़ा, दलित हूं’ और ‘सुप्रीम कोर्ट जातिवादी है’ जैसे स्लोगन लिखे बैनर ओढ़कर पहुंचा था। अभ्यर्थियों के हाथों और पूरे शरीर पर भी स्लोगन लिखे हुए थे।



प्रदर्शनकारियों की पुलिस से जमकर नोकझोंक हुई।
योगी राज जातिवादी, सुप्रीम कोर्ट जातिवादी
अभ्यर्थियों का कहना था- मैं अभागा, पिछड़ा दलित हूं। सुप्रीम कोर्ट जातिवादी है। पिछड़ा दलित आरक्षण का विरोध, जातिवादी योगी राज। ग्राफिक्स के जरिये समझाया है कि 15% सवर्णों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 1 दिन में फैसला दिया। पिछड़ा-दलित 85% हैं और उन्हें 10 महीने से कोई फैसला नहीं दिया गया। 69 हजार शिक्षक भर्ती में आरक्षण वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए कुछ नहीं हो रहा है।

‘हम रोज आएंगे, देखते हैं पुलिस कब तक रोकेगी’
प्रदर्शन में शामिल अमरेंद्र ने कहा- हम रोज आएंगे और एक-एक विधायकों-नेता-मंत्रियों को घेरेंगे। देखते हैं पुलिस कब तक रोकती है? जब तक हमारी सांस रहेगी तब तक यह लड़ाई लड़ेंगे। ओम प्रकाश राजभर और स्वामी प्रसाद मौर्य दावा करते हैं कि वह पिछड़ों के सबसे बड़े नेता हैं। अगर वह पिछड़ों के नेता होते तो उनके बच्चे जो पिछड़ी जाति से आते हैं मार कैसे खाते?
हम लोग प्रदर्शन करने आए हैं। पुलिस डर रही है। सबको गाड़ियों में ठूंस रही है। ये नेता-मंत्री पुलिस को आगे करके हम लोगों को पिटवा रहे हैं। लाठी खिलवा रहे हैं। अगर हमारे नेता मजबूती के साथ खड़े होते तो अब तक नौकरी मिल जाती। यह दुर्भाग्य है कि अब तक सुप्रीम कोर्ट में हो रही सुनवाई में सरकार का वकील नहीं पहुंचा।

