
परिजनों से वीडियो कॉलिंग के माध्यम से लगातार होती है बात।
मिहीपुरवा। तहसील क्षेत्र के ग्राम पुरैना रघुनाथपुर के नब्बेपुरवा, नधापुरवा व खैरी गांव के आठ मजदूर इन दिनों पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भी सुरक्षित हैं। ये सभी मजदूरी करने के लिए कुछ समय पूर्व इज़राइल देश गए थे और वर्तमान में वहां चल रहे ईरान के साथ युद्ध जैसे हालात के बीच अपने परिवारों के लगातार संपर्क में हैं।
क्षेत्र में जब से ईरान और इज़राइल के बीच तनाव बढ़ने की खबरें प्रसारित हुईं, तब से परिजनों की चिंता बढ़ गई थी।मोबाइल पर हो रही नियमित बातचीत ने परिवारों को बहुत बड़ी राहत मिली है।
इसराइल के तेल अवीव शहर में मौजूद संतोष कुमार पुत्र छेदीलाल ने फोन पर बताया कि वे लोग तेल अवीव शहर के एक मकान मे रह रहे हैं। उन्होंने कहा, जब कभी मिसाइल ईरान की तरफ से आ जाती हैं, तो यहां की सुरक्षा प्रणाली बेहद मजबूत होने के कारण मोबाइल पर पहले ही चेतावनी संदेश मिल जाता है,
जिससे सभी लोग निर्धारित सुरक्षित बंकरों में पहुंच जाते हैं। प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहता है संतोष ने बताया कि इज़राइल में अत्याधुनिक रक्षा कवच प्रणाली पूरी तरह क्रियाशील है, जो अधिकांश मिसाइलों को हवा में ही मारकर गिरा देती है। चेतावनी सायरन बजते ही लोग नजदीकी बंकर की ओर चले जाते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय प्रशासन मजदूरों सहित सभी नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है। गांवों में रह रहे परिजन दिन में कई बार फोन पर हालचाल लेते हैं।परिजनों ने बताया कि जब बच्चों से बात हो जाती है।
तो मन को बहुत शुकून मिल जाता है। इन आठों मजदूरों में से सभी निर्माण कार्य से जुड़े हैं वे सभी एक साथ एक की मकान में रहते हुए सावधानी बरत रहे हैं। युद्ध जैसे हालात के बीच भी मिहीपुरवा के इन श्रमिकों का साहस और सतर्कता उनके परिवारों के लिए सबल बना हुआ है।
क्या कहते हैं इजराइल में मौजूद मजदूरी करने गए संतोष कुमार।
फोन पर वीडियो कॉलिंग के माध्यम से संतोष कुमार से बात की गई तो उन्होंने जानकारी दी इजराइल के तेल अवीव शहर में हम लोग मजदूरी कर रहे हैं। हमारे साथ रह रहे हैं सभी लोग सुरक्षित हैं। स्थिति सामान्य जैसी है इजरायल की सुरक्षा प्रणाली इतनी मजबूत है। की आने वाले किसी भी मिसाइल को हवा में ही नष्ट कर देती है।
शहर में 500 मीटर की दूरी पर बंकर बने हुए हैं। किसी आपातकाल में मोबाइल पर मैसेज आ जाता है। तो सभी लोग सुरक्षा के दृष्टिगत बंकरों में पहुंच जाते हैं। सतोष कुमार वीडियो कॉलिंग के माध्यम से कमरे से बाहर निकलकर कुछ दृश्य दिखाएं उस दौरान सड़कों पर कुछ सन्नाटा जरूर दिखाई दिया।
लेकिन स्थिति सामान्य रही वहां के लोग दुकानों पर खरीदारी करते हुए नजर आए साथ ही यह भी जानकारी दी 8 से 12 घंटे की ड्यूटी होती है। वहां के सभी लोग आपसी भाईचारे जैसा व्यवहार करते हैं किसी से कोई मतलब नहीं होता है। भारतीयों से किसी प्रकार का कोई भेदभाव नहीं है।

